सबको समझने में लगे हैं हम,
खुद को समझे कौन?
दुनिया की भीड़ में खोकर बैठे,
मन की सुने कौन?
चेहरे पर मुस्कान सजी है,
आँखों को पढ़े कौन?
सब कहते हैं “वक्त बदल जाएगा”,
दर्द को समझे कौन?
दूसरों को हिम्मत देते,
खुद को संभाले कौन?
सबकी राह आसान बनाते,
अपनी राह सँवारे कौन?
कल की चिंता में आज गँवाया,
आज को जीए कौन?
दुनिया से जीतने की चाह में,
खुद से जीते कौन?
एक दिन सब पीछे छूट जाएगा,
फिर साथ हमारे होगा कौन?
- प्रिया
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