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शायद न मिले होते

                
                                                         
                            हमे तुमसे प्यार न हुआ होता,
                                                                 
                            
तो राहें अनजानी ही रहती,
न आँखों में कोई ख्वाब सजता,
अगर हम शायद न मिले होते।
वो हँसना, वो रोना, वो बातें तुम्हारी,
वो रातों का लंबा अफ़साना हमारा,
वो जागती आँखें, मेरे बिना रातों को सो जाती,
अगर हम शायद न मिले होते।
माना कि दूर होने का गम गहरा है,
हर याद पे ज़ख्मों का पहरा है,
तू खुश रहती मेरे बगैर अक्सर,
अगर हम शायद न मिले होते।
तेरी बंसी का चारा हमने पकड़ा है,
न पकड़ते तो शायद ये ज़िंदगी ही न होती,
पर अफ़सोस! तुझे पाकर भी हम तुझे खो बैठे,
काश... हम वाक़ई कभी मिले ही न होते।
- प्रेम शंकर
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5 महीने पहले

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