आकर तमन्नाओं के बहकावे में हुए नाकाम बार बार जिंदगी से चल कर कांटों की राह पे दर्द और हम बढ़ाने लगे
गमों की वारिस ने तो दर्द कुछ और बढ़ा दिया खो कर तुम्हें बार बार होकर मायूस चिराग़ ए दिल हम बुझाने लगे
रस्म ए वफा के नाम पर निभाया मैने फर्ज बड़ी शिद्दत से करके याद तुमको बार बार दिल को हम समझाने लगे
सब कुछ तो बदल गया वक्त के साथ साथ मगर इक याद तेरी है जिंदा अभी भी ये सोच कर हम मुस्कराने लगे
है ये भी यकीं हमें तू बेवफा हो सकता नहीं कभी और परख के फितरत तेरी सोच के अंजाम दर्द हम बढ़ाने लगे
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