अपनी नाकामियों का जश्न मना रहा हूं चल कर अजनबी शहर के अजनबी रस्तों पर मैं उलझनें बढ़ा रहा हूं
गिला तुमसे करना आसान इतना नहीं बढ़ा कर मुश्किलें अपनी ही लौट के तेरे दर से फासला मैं बढ़ा रहा हूं
सामने तेरे जिक्र मुफलिसी का कभी कर सकता नहीं मैं कर के इंतजार तेरे वादों पर तुमसे दूरी बढ़ा रहा हूं
बगैर तेरे मेरी जिंदगी को हुआ क्या डूब कर ख्वाबों में ही होकर मायूस जिंदगी से दिल अपना बहला रहा हूं
उदासियां कर रही इशारा हुआ क्या हमें होकर मायूस अंदाज ए बेरुखी से तुमसे अब मैं फासला बढ़ा रहा हूं
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