काश खुदा मेहरबान मुझ पे हो जाता करके ऐतबार वफाओं पे अहसान कुछ और कभी वो मुझ पर कर जाता
या खुदा दर्द मुझे मगर करूं इज़हार ए दर्द ओ तमन्ना किस से मिटा कर अरमां सारे दिल कभी मेरा मर जाता
छीन के चैन ओ सकूं मुझसे अब ये बता दो करके बेकरार हमें बार बार अहसान मुझ पे कभी तू क्यूं कर जाता
रहा तू कब खुश मिजाज़ मुझ पर याद नहीं हमें सितम ये करके वादे हज़ार अक्सर जुल्म तू क्यूं बढ़ा कर जाता
किया कब इनायत मुझ पे तुने हमें याद नहीं जब भी सोचा मैने दरिया में डूबने को किनारा हमें तू क्यूं कर जाता
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