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फसाना ए मजबूर दिल

                
                                                         
                            करूं अब क्या हमें घुट घुट कर जीना पड़ेगा मिटा कर ख्वाहिशें सारी सफर में तुमसे फासला रखना पड़ेगा
                                                                 
                            
थी ये तमन्ना मर्ज तुमसे और कहना ना पड़े सितम ये मिटा कर ख्वाहिशें सारी हुआ जो दर्द कहना पड़ेगा
पूछते नहीं तुम हाल मेरा तो हुआ क्या हमें भी मिला के खुद को खाक में कोशिश सारी अब भूलना पड़ेगा
सिवा तेरे मेरा कोई अपना ना रहा इस जहां में हमें बना कर इक बहाना अंदाज जीने का भी ढूंढना पड़ेगा
तुम्हें भी मेरे करम पे शक क्यूं वरना मेरा कसूर क्या बताया नहीं कभी इरादा अब क्या तेरा जानना पड़ेगा
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1 hour ago

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