उम्मीद मेरी कहीं और बट नहीं सकती हमने सीखा है अंधेरों में जीना सोच मेरी कहीं और ठहर नहीं सकती
देख के लाचारी मेरी मुंह मोड़ लिया तुमने करो लाख जुल्म मुझ पर मगर ये सोच मेरी कभी बदल नहीं सकती
तू कब हुआ मेरा ये तो बता सितम मोहब्बत में हो सकती जरूर मगर हद से ज्यादा जुल्म भी ठहर नहीं सकती
दर्द मेरा और बढ़ाने वाले मिला है कुछ क्या तुम्हें करके कोशिशें नाकाम तमन्ना मेरी भी कभी बिखर नही सकती
अब और न दर्द बढ़ा तू मेरा कुछ तो रहम कर हालांकि अरमान मेरा पास गया तेरे मगर सच्चाई मर नहीं सकती
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