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फसाना ए बेचैन ख्वाहिशें

                
                                                         
                            बढ़ाया फासला जब से दरमियां आह लब पर रह जाएगा तू ना हो सकेगा मेरा ये सोच कर दिल प्यासा रह जायेगा
                                                                 
                            
सामने तेरे दर से यूं खामोश गुज़र जाएंगे दिया जो जख्म तुमने किसी रोज सीने में ही दिल का हादसा रह जाएगा
कुर्बतों की राह गुज़र के मिला क्या हमे देख कर मनहूस जिंदगी दिल में तसव्वुर का अब इक आसरा रह जायेगा
तेरे न होने पर निगाह ए शौक दर्द का हाल मत पूछो मैं बिखर गया तू और लेकर चिराग हमें ढूंढता रह जायेगा
खुश है बढ़ा के फासला मुझसे कोई बात नही रहे मुबारक तुम्हें जिंदगी दिल में तो सिर्फ याद खुदा का रह जायेगा
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एक घंटा पहले

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