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फसाना ए बेचैन धड़कनें

                
                                                         
                            बढ़ा के फासला खिलाफ मेरे चैन ओ सकूं तुम खो दोगे मगर है अर्ज तुमसे गम ए जुदाई से हमें बचाते रखना
                                                                 
                            
होकर खुदगर्ज वफा मेरी तुम ही भुला गए हो जान कर मिजाज़ वक्त का खुद को तुम आइना दिखाते रखना
गुजरती जो दिल पर मेरे किसी और से कह सकता मैं नहीं वक्त ए रुखसत तोड़ कर दिल दर्द बढ़ाते रखना
मिली खुशी हमें देख के अचानक सामने तुम्हें करके याद गुज़रा ज़माना रस्म ए अदा कुछ और निभाते रहना
था नाज़ तुम्हें बहुत अपनी बेवफाई पे बेशक करके याद गुज़रा ज़माना तुम चिराग़ ए दिल मेरा बुझाते रहना
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27 मिनट पहले

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