बहा कर अश्क बार बार फिर भी चिराग़ ए दिल अपना जला ना पाएंगे मिला जो दर्द हमें सह कर अरमां मिटा ना पाएंगे
मिली जिंदगी तो चैन ओ सकूं से जी लेने दो करके हम बगावत तुमसे फिर भी बेचैन दिल को ही हम समझा ना पाएंगे
किया बर्बादियों ने भी नाकाम कितना हमको सता कर हम दिल को बार बार अब तो चिराग़ ए दिल भी जला ना पाएंगे
खाकर ठोकरें राह ए वफा समझाऊं दिल कैसे भी करके शुमार दर्द अपना होकर मायूस हम दिल को समझा ना पाएंगे
ऐ जिंदगी दर्द हमें कितना कह ना अभी तक किसी से तोड़ कर दिल अपना ही यादों के कारवां में सच भुला ना पाएंगे
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