आकर मेरी तन्हाई में कभी बुझा कर दिया आस का दर्द अपनी मर्जी के मुताबिक कुछ और बढ़ा जाते हो
मैं कोई पत्थर नहीं इंसान हूं समझा नहीं तूने कभी शायद जान के महरूमी करके मायूस दर्द बढ़ा जाते हो
मिटा कर अरमां सोचा नहीं तुमने जाऊंगा मैं कहां तुम तो करके वादे हजार अक्सर नींद मेरा चुरा जाते हो
कभी तो तमन्ना दिल में रख कर आरजू में सोचा करो हमें जान कर तू पराया चिराग़ ए दिल बुझा जाते हो
बुरा वक्त जब आता है तो अपने हो जाते हैं पराए तुम मिटा कर अरमां सारे खिलाफ फैसला सुना जाते हो
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