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दर्द ओ बेचैन तमन्ना

                
                                                         
                            जो गुज़र गया जमाना वापस लौट कर नहीं आयेगा कभी ये तालाब दरिया किसी रोज यूं ही सूख जाएंगे
                                                                 
                            
हालांकि इससे पहले सफर किया है हमने कई बार मगर इस बार लगा शायद अब तुमको यूं ही भूल जायेंगे
तू भी न हो सका मेरा ये हमें बता गम किसे सुनाएं तुम चलो अपनी राह हम होकर दूर यूं ही दर्द भूल जायेंगे
कोई तो होगा इस ज़माने में हम उससे दिल अपना लगा कर तेरी मर्जी के मुताबिक तुमको यूं ही भूल जायेंगे
हुए नाकाम जब से हम घर अपना छोड़ के आए हैं चल कर कांटों की राह दूर होकर दर्द यूं ही भूल जायेंगे
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20 घंटे पहले

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