मिल कर आपसे जब जुदा हुए तो मुझसे खफा हो बैठे मिटा कर अरमां आप बेवफा हो बैठे
देख के बेरुखी तेरी हम खुद में ही खो बैठे तू भी न हो सका मेरा सोच कर अब आस खो बैठे
लिखा जो खत मैने तुम्हें मिला होगा जरूर और न दिया तूने जवाब सोच के हम वफा खो बैठे
बात दिल की सुनने की फुर्सत है कहां गर्दिश ए हालात अब सोच कर दिल के अरमां खो बैठे
है दर्द हमें खफा तुम्हें देख कर अब हक वफा का जता कर तुमसे हम अपनी जिंदगी खो बैठे
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X