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बेचैन ख्वाहिशें

                
                                                         
                            देख कर अपनी गर्दिश ए हालात हमें तो रोना जरूरी है खुशी मिले या न मिले कहना जरूरी है
                                                                 
                            
इस जहां में खुशी भी हर किसी को कहां नसीब हमें अब बैठ कर घर के कोने में रोना जरूरी हैं
कहना तो था बहुत मगर कह न सका तुमसे हाल कैसा भी हो इस शहर में तेरा होना जरूरी है
हम ओढ़ लेते हैं खुद को यादों की चादर से वक्त ए रुखसत ये अहसास का बिछौना जरूरी है
खुशहाल मैं हो सकता नहीं पता है तुम्हें फिलहाल हमें यादों के कारवां के साथ जाना जरूरी है
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17 घंटे पहले

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