मिटा कर दिल के अरमां हम आंसू बहाने लगे हम न रहे तेरे प्यार के काबिल सोच कर घबराने लगे
बुझा दो चिराग ए मोहब्बत कहने लगे है नहीं फरेबी उजालों की जरूरत हमें सोच कर दूर जानें लगे
किस्मत में जो लिखा होना था हो चुका हमें भी नहीं जरूरत सवालों की सोच के तुमसे दूर होने लगे
अब ये बताओ हमें जुल्म तेरा कब तक जमा मुझ पर रहेगा मिजाज़ तेरा भांपने करीब हम आने लगे
तेरा ये शौक पहले दोस्ती फिर दुश्मनी करना परख कर अब तो ख्वाबों से ही दिल हम बहलाने लगे
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