जाता दिसम्बर कुछ कह गया, भूल जाओ वो ग़म सारे जो बीते वक्त का निशां थे,
याद रखो उन सुनहरी यादों को जो तुम्हारे खुशियों का जहां थे,
आता जनवरी नई सौगातें ला रहा है , नए -नए अरमां जगा रहा है,
आने वाले कल में हर इन्सान कुछ नए वादे करेगा और निभाएगा,
करो कुछ ऐसा काम नेक कि याद जहां सारा रख सके जिसे,
भूला कर यादें कड़वी, क्रोध और इर्ष्या को, प्यार में बदल सके इसे,
माना कुछ खोया होगा बीते साल में, कुछ गवांया होगा होकर बदहाल,
रख हौंसला नए सपने बुनो तुम, करो फिर से नई मंज़िल तलाश,
ग़र ममदगार बनेगा तू अपना तो खुदा भी मदद के लिए आएगा,
तू ग़र भरेगा झोली किसी की खुशियों से, खुदा तेरी झोली भी भर जाएगा,
खुशी से कर दिया विदा बीते साल को, दे आह्वान इस नए साल को,
कर संकल्प ना अपने ईमान से डिगना है, चाहे कोई भी हाल हो।
-प्रेम बजाज
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