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सावन आया

                
                                                         
                            सावन आया झूम - झूम कर, बादल बरसा घूम-घूम कर,
                                                                 
                            
तन भी भीगा, मन भी भीगा, अंगिया भीगी, मनवा भीगा,
अम्बुआ की डाली झूला पड़ा है , मन मेरा भी झूम रहा है।

बागों में मेला, फूलों का ठेला, झूलों का मौसम, संग मेरे साथी अलबेला,

कलियों पे मंडराया भंवरा , धानी चुनरिया ओढ़े धरा।

कूके कोयल अम्बुआ की डाली , निखरा यौवन, इतराए गोरी प्यारी,
उर -आंगन में पिया मिलन को नाचे आशाएं मतवाली।

कहीं पे किश्ती बना कर चलाएं बच्चे , कहीं उछल - कूद करते हैं ,
बारिश में भीगते - भागते, हंसते - गाते , मौज-मस्ती करते हैं।

कहीं पे सखियां गाती गीत खुशी के , झूले झूला, भीगती-भागती जाए रे,
प्यासी - सुखी धरा पर देखो सावन की घटाएं बरस-बरस जाएं रे ,
इन्द्रधनुष भी देखो कैसी मनभावन छटा दर्शाए रे।

तन की गर्मी दूर कर शीतलता दे जाता सावन,
हवा में महक, फिज़ा में रंग , जीवन को भी रंगीन बनाए सावन,
झूम-झूम कर आया सावन , ढेरों खुशियां लाया सावन।

प्रेम बजाज, जगाधरी ( यमुनानगर )
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4 वर्ष पहले

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