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खाली समय

                
                                                         
                            आज की आपाधापी में नहीं मिलता किसी को खाली समय,
                                                                 
                            
जिससे भी पूछो कहता वो अपने लिए निकलता नहीं समय।

जब भी मिले समय खाली तुम्हें, करो समय का सदुपयोग,
थोड़ा सा तुम योगा कर लो, थोड़ी करो कसरत, रहोगे निरोग।

था एक वक्त, जब खाली समय बहुत हुआ करता था,
तब यही इन्सान हर काम अपने हाथों से ही किया करता था।

आ गई मशीनें करने को काम, तो भी समय का हुआ है अभाव,
ना जाने कैसा ये आया है ज़माना, हर कोई अलापे राग समय का है अभाव।

खाली समय बैठो मात-पिता के पास,
कर लो चंद बातें उनसे, दो उन्हें अपनेपन का अहसास।

खेलो कभी संग बच्चों के बन कर बच्चे आप,
लौट आएगा बचपन फिर से, बन जाओगे बच्चे तुम भी,
भूल जाओगे कि तुम हो उनके मां-बाप।

मिले जो खाली समय कभी लेकर डायरी-पैन हाथ, लिखो उस में हाल दिल का, और लिखो जज़्बात।
जब भी होए खाली समय लो सुध थोड़ा रिश्ते-नातो की तुम,
किसी पुराने सखा- सखी को कर लो एक फोन तुम।

मत सोचो ये कि उसने मुझे तो किया नहीं कभी याद,
ना रहेगा जब वो साथी, फिर किससे करोगे गिले- शिकवे, किससे करोगे फरियाद।

ना जाने कितनी बची ज़िन्दगानी और कितने बचे हैं स्वांस,
कर लो जो भी करना है, मिलेगा ना समय फिर ये, बस रह जाओगे सोचते आप।

प्रेम बजाज ©®
जगाधरी ( यमुनानगर)
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 वर्ष पहले

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