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जाने दो

                
                                                         
                            मत रोको कोई इसे जाने दो
                                                                 
                            

मत रोको कोई इसे जाने दो, जा कर फिर से एक बार दुबारा आने दो,
जाते हुए दिसंबर अलविदा कह रहा है, मगर देखो उधर से जनवरी आ रहा है,
ठंडी-ठंडी हवाओं में, दिसम्बर की बर्फीली फ़िज़ाओ में, दो बदन जब मिले थे,
ना ही कोई शिकवा-शिकायत था ,ना ही उनको कोई गिले थे,

ठंडी बरसातों में, पूस की रातों में, डाल बाहें बाहों में, दो प्रेमी कंवल दल से खिले थे,
प्रेम पूजा करते हुए वो प्रेम मंदिर में मरे और जीए थे,
मगर प्रेम का अंत कहां होता है, प्रेम भला पूर्ण ही कहां होता है,
आएगी फिर ठिठुरती जनवरी जब, होगा वही जो दिसम्बर में होता है,
बर्फीली हवाएं फिर भी आएंगी, आशिकों को भावुक कर के करीब लाएंगी,
ना आशिक लब खोल पाएगा, ना ही माशूक कुछ कह पाएगी,

इस तरह सर्द गर्म मौसम में प्यार पलेगा, बीतेगा साल फिर से दिसम्बर आएगा,
उन ठंडी बर्फीली हवाओं संग दिन पुराने दोहराएगा, इश्क फिर से तड़पाएगा।

प्रेम बजाज ©®
जगाधरी ( यमुनानगर)
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2 वर्ष पहले

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