मिले हो आज नसीब से न जाने फिर हमारे नसीब में ये बात हो न हो,
आ के रोक ले वक्त हो आज हम फिर वक्त हमारे हाथ हो न हो,
एक बार तो लगा लो गले से कि इस दिल को थोड़ा करार आ जाए,
कल का क्या पता कल हमारे नसीब में फिर मुलाकात हो न हो,
आज भड़क उठे हैं जो शोले जज़्बातों के, न दबाओ उस आग को,
सुलगने दो उन अरमानों को कल इस दिल में फिर ये जज़्बात हो न हो,
आ के भूलकर सब भीग जाएं थोड़ा प्यार की बरसात में हम,
जाने कब आ जाए पतझड़ फिर ये प्यार के सावन की बरसात हो न हो,
आ के खुदा से प्यार की लम्बी उम्र की दुआ मांग ले आज हम,
तेरी जुदाई में प्रेम खुदकुशी न कर ले, फिर ये दुआ वाली रात हो न हो।
-प्रेम बजाज
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