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दरिया के किनारे

                
                                                         
                            नहीं होता नसीब में मिलन किनारों के,
                                                                 
                            
मगर धाराओं को मिलाते हैं किनारे,
दूर रह कर भी इस तरह से पास आते हैं किनारे।

माना हम दूर है, मिलने को मजबूर हैं,
ये जहां की रवायतें भी कितनी अजीब हैं,
मिलने भी नहीं देते, मिलने का जरिया भी बक्शते हैं।

रखते हैं किनारों को दूर-दूर,मगर धारा को
मिलने का जरिया खुद बनाते हैं।
चाहने वालों को हमेशा जुदा किया जाता है,
शब-भर तड़पता है परवाना जिस शमां में जलने को,
उसी को बुझा दिया जाता है।

एक जन्म का किसी को पता नहीं होता,
सात जन्म के लिए वचन लिया-दिया जाता है।
मगर सच्चे चाहने वाले कहां बांधे जाते हैं,
एक जन्म में ग़र नही मिल सकते तो ,
अगले जन्म में साथ निभाते हैं।

प्रेम बजाज ©®
जगाधरी ( यमुनानगर)
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3 वर्ष पहले

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