सुना है इस सदी पर तरुणाई आई है,
ये सदी भी यौवन की बहार लाई है,
चौबीसवां साल चढ़ रहा है इस सदी को,
तेइसवां साल अलविदा कहता इसको,
बुढ़ा हुआ दिसम्बर जाने को है तड़प रहा,
जवानी की दहलीज पर जनवरी कदम रख रहा,
दिसम्बर की ठिठुरन विदा ले रही देखो,
जनवरी का पाला शान से आ रहा देखो,
आतिश जनवरी के यौवन की दिसम्बर को मुंह चिढ़ाए,
ढलता यौवन दिसम्बर का बैठा मुंह छिपाए,
कल फिर लौट कर ये वक्त आएगा,
जब जनवरी का यौवन ढल जाएगा,
बीतेंगे महीने-दर-महीने दिसम्बर
होकर जवां अपने जलवे दिखाएगा,
तारीखें बदली, बदले महीने, कुछ रूठे,
कुछ छूटे, कुछ मिल गए नए,
भूल कर पिछली तारीखों को
नए दिनो का आग़ाज़ करें,
जो छूट गए, जो रूठ गए, उन्हें मनाए,
नई शुरुआत करें,
भूला दो ग़म जो बीते,
आने वाली खुशियों का आग़ाज़ करें।
-प्रेम बजाज
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