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बहुत याद आते हैं पापा

                
                                                         
                            बहुत याद आते हैं पापा
                                                                 
                            

बहुत याद आते हैं पापा, कितना लाड लडाते थे पापा
जब भी करता था शरारत, डांट लगाते थे पापा।

जब मैं रूठ जाता था, खिलौने दे कर मनाते थे पापा
स्कूल के लिए हो जाता लेट, खुद छोड़ कर आते थे पापा ।

पढ़ने में नहीं लगता मन, मगर डांटकर पढ़ाते थे पापा
मां करती जब गुस्सा, अपनी बगल में छुपाते थे पापा।

करता था आवारागर्दी दोस्तों संग, कान पकड़ घर लाते थे पापा
कभी चोरी से बीड़ी पीते जो पकड़ा जाता पिटाई करते थे पापा ।

जब मैं होता था बीमार तो सारी रात जागा करते थे पापा
पापा के गुस्से में भी छुपा होता था प्यार, पर कभी ना दर्शाते पापा।

- प्रेम बजाज 
जगाधरी ( यमुनानगर)
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4 वर्ष पहले

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