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नन्ही सी जान वो

                
                                                         
                            नन्ही सी जान वो 
                                                                 
                            



नन्ही सी जान वो
सबकी दुआओं का
परिणाम वो

मासूम सी सूरत वो
आँखों में लिए उम्मीद
देख रही इस जहांन को 



पैदा हुई एक
लड़की के रूप में
मिला दिया जिसे इस
दुनिया ने धूल में !!

इंतज़ार था जिसका सबको
बेसब्री से
पल न लगाया उसको
उन्होंने भूलने में 





वो एक जान थी
बेशक बेजुबान थी 

उसके दिल में

छप गई थी

तस्वीर उन माँ बाप

की

जिनकी ऊँगली

पकड़ कर भरना चाहती
थी ज़िन्दगी की

उड़ान वो !!



मासूम थी
मगर उनकी आगोश
में महफूज़ थी !!



न इल्म था
उनके इन इरादों का

बस यकीन था
उन माँ बाप पे !!!



दिल में भरा उसके
जो दर्द था

पी गई उन
आग की लपटों के साथ वो !!



तड़प थी
माँ की ममता की

और बाबा
के लाड की !!



सब राख हो गई

उम्मीदे वो
बस बच गई

चीखें वो !!

कुछ रह गए
उसके सवाल थे

जिन्हें पूछती थी
वो हर पल उस अंदाज़ में !!



सिसकती थी हर पल
क्या यही अंजाम था

इस जान का ....
क्यों कर दिया
तुमने अपराध ये !!



माँ बोझ न
बनती मैं
मुझे पूछा तो होता
क्या पाप का परिणाम

सह पाएगी तू इस संसार में !!



न मैं आऊँगी अब
दुबारा

उस जहांन में

जहाँ
फरिश्तेेे  भी  होते हैैं 

ऐसे नकाब में !!



माँ न तू करना
अपनी दूसरी

संतान के साथ ये...

बाबा को कहना
चाहती थी मैं

उन्हें दिलो जान से !!



नन्ही सी थी एक जान मैं .....!!!!!



- प्रीति



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7 वर्ष पहले

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