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नारी वृक्ष बन जा

                
                                                         
                            छोड लता का धर्म , नारी वृक्ष बन जा
                                                                 
                            
स्व कर अपना कर्म, नारी दक्ष बन जा
कोमल गात का मोह छोड, दृढ़ता से नेह जोड
नजाकत पर कठोरता की भित्ती ओढ़,मजबूती का साक्ष्य बन जा
छोड लता का धर्म, नारी वृक्ष बन जा
स्व कर अपना कर्म नारी , दक्ष बन जा।
दुनियां के सारे, छोड दे सहारे
कर अपना विस्तार, बन ना किसी पर भार
घूम सके स्वतंत्र जिस पर , खुद ही अपना अक्ष बन जा
छोड लता का धर्म, नारी वृक्ष बन जा
स्व कर अपना कर्म, नारी दक्ष बन जा।
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11 महीने पहले

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