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उजालों से कह दो हमें रास्ता ना दिखाए

                
                                                         
                            उजालों से कह दो हमें रास्ता न दिखाए
                                                                 
                            
मैं अँधेरों में चलने का आदि हूँ।

उजालों से कभी नाता रहा नहीं मेरा
अंधेरी गलियों का पुराना मुसाफ़िर हूँ।

डर लगता है रोशनी की चकाचौंध से
हर शख्स देखता फ़रेब की निगाहों से।

अंधेरे में अपना साया भी नजर नहीं आता
कौन अपना कौन पराया कुछ पता नहीं चलता।

इंसानों को पहचानना अंधेरे में सीखा
उजाले में तो सभी चेहरे चमकदार थे।

उजाले में इंसानियत का क़त्ल होते देखा
अंधेरे में सब एक दूसरे का हाथ थामे था।

अंधेरे में जिसने किसी से रास्ता नहीं पूछा
उजाले में अपना हीं पता पूछते देखा।

उजालों से कह दो हमें रास्ता न दिखाए
मैं अँधेरों में चलने का आदि हूँ
मैं अँधेरों में चलने का आदि हूँ।।
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33 minutes ago

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