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कुछ सवाल जबाब।

                
                                                         
                            क्या मतलब है रोने का?
                                                                 
                            
क्या हम जिनके लिए रो रहे हैं, उन्हें पता भी होगा?
क्या मेरा रोना और उनका सपने में आना, उन्हें पता भी होगा?
क्या वो पल जिससे मैं गुजर रहा हूँ, उन्हें महसूस भी होता होगा?
क्या इन आँसुओं का कोई मोल है?
क्या मेरा अकेले में किसी के लिए रोना, किसी को पता भी होगा?
या यह सब बस यूँ ही है?
बार बार पूछता हैं मन मुझसे
दिल कभी ईश्वर से पूछता है कि क्या आपने उन्हें बताया भी होगा?
कि मुझे कितना दर्द है और मैं कितना रोया हूँ?
क्योंकि उनके पास पहुँचने का अब कोई और जरिया ही नहीं है।
यदि आपने बताया भी होगा, तो क्या उन्होंने मेरे बारे में कभी सोचा भी होगा?
क्या मेरा हाल भी आपसे पूछा होगा?
यही सब सोचते-सोचते मैं थक जाता हूँ और अंत में खुद से कहता हूँ:-
क्यों रोते हो, क्यों सोचते हो ?
आना जाना तो लगा रहेगा फिर क्यों रोना किसी के लिए ?
उसकी भी अपनी जीवन है ,अपनी स्वतंत्रता है
और कही न कही वो सही भी है,तो फिर क्यों ऐसे आशा पालना? ये तो तुम्हारा स्वार्थ हैं |
और अब बस!
कमियाँ तुममें ही हैं, अब वह सब भूल जाओ।
वह एक बुरा सपना था, उस नींद से जाग जाओ।
अभी और भी है कुछ करने को, जीवन में आगे बढ़ने को।
बस सिवाय रोने को , झूठी दिलासा देने को।
जीवन को नई एक मोड़ दो, और छोड़दो उस हिस्से को
एक वेग दो, संवेग दो मोह माया को तुम छोड़ दो
और लक्ष्य के पीछे दौड़ लो , तब होगा फ़िर
कारवां उन लोगों का जो तुम्हे कभी छोड़ा था।
:- प्रवीण
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6 घंटे पहले

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