रूप रंग अंग संग, भाल लाल सूर्य तेज,
नैन कोर ओट लाज, प्रेम रास घोलती।
चाल ताल मन्द मन्द, वात संग पुष्प गंध
प्राण मीत मग्न आज, हंस चाल डोलती।
स्वर्ण रूप शिल्प कार, मध्य नाग वक्र देख,
अंग अंग काव्य छंद, प्रीति द्वार खोलती।
बिम्ब ओष्ठ मन्द हास, शंख कण्ठ वेद पाठ,
ज्ञान ध्यान मोक्ष मार्ग, सत्य तथ्य तोलती।
- प्रत्यूष गौतम
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