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रौद्र वीणा पर, महाकाल का

                
                                                         
                            पकड़ोगे! तो पकड़ो,
                                                                 
                            
जकड़ोगे! तो जकड़ो,
मारोगे! तो मारो,
काटोगे! तो काटो,
मगर! कदम पीछे नहीं हटेंगे,
हौसले! पस्त नहीं होंगे,
खून! दरिया बन बहेगा,
शीष! लोकतंत्र की वेदि पर चढ़ेगा,
शहीदों की चिताओं से! शोला उठेगा,
इंकलाब! का जलजला उठेगा,
गाँव, शहर, जंगल जलेगा,
धुएँ से अंबर और नरक तक काँप उठेगा,
उसका एक पतंगा ही पर्याप्त होगा,
महादेव की लंका! को भस्म करने,
जिसे तू चोरी करके बैठा है,
शिवभक्त का स्वांग रचकर,
रुद्राक्ष-भस्म! ज़िस्म से लपेटकर,
सब श्मशान होगा, हाहाकार होगा,
अट्टहास होगा, तांडव स्तोत्र होगा,
रौद्र वीणा पर, महाकाल का
महासंगीत होगा....!!!
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36 मिनट पहले

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