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वानर-भालू एक होकर, स्वर्ण लंका दहन कर दो।

                
                                                         
                            चरागों को जलाकर बाहर रख दो,
                                                                 
                            
अंधेरे में है दुनिया, इसे रोशन कर दो।

नीम खिलाओ, खून साफ कर दो,
नशे में है दुनिया, जुवान कड़बा कर दो।

नकाबों के शहर में, गुमराह हैं रास्ते,
मदहोश है सत्ता, जनता को होश में कर दो।

भगवान बिक रहा है, मठ-मंदिरों में,
अमीरों के ऐब देखो, ईश्वर को बेनकाब कर दो।

ईमान तुल रहा है, सत्ता की दहलीज पर,
कर्ण बन जाओ और कवच-कुंडल नीलाम कर दो।

खेत लुट रहा है, गार्डन होने के वास्ते,
किसानों को खरीदकर, गाँव को शहर कर दो।

किसको पता है देशभक्त होने की कीमत,
प्रचार का है जमाना, गाँधी को देशद्रोही कर दो।

धर्म और सरहदों ने, नोंच दी है इंसानियत,
सभी फूलों को तोड़ो, बगीचे को एक रंग कर दो।

न्याय का तराजू, भीड़ ने पकड़ा है,
किसी को भी पकड़ो और मोबलिंचिंग कर दो।

तल्लीन है भारत, भक्त होने की दिशा में,
तानाशाह को बुलाओ, देश को फिर गुलाम कर दो।

फाइलें सजी हुई हैं, दफ्तरों की मेज पर,
अफसरों की अकड़ देखो, फाइलों को आग कर दो।

आवाज दब रही है, रावण के खौफ में,
वानर-भालू एक होकर, स्वर्ण लंका दहन कर दो।
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3 घंटे पहले

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