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दिन

                
                                                         
                            कुछ खास है आज का दिन , हवाएं कुछ तेज है
                                                                 
                            
वतन हिन्द का लेकिन जुबां अंग्रेज़ है
कोई आये तो देखने नज़ारा शराफत का
नज़कात खुद पूछेगी के हम कितने रंगरेज़्ज़ है  

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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7 वर्ष पहले

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