वीर हो तो वीरता के मूल को पहचान लो,
विद्यार्थी हो तो विद्या के विधि को जान लो।
आत्म की हत्या करके करते हो जो पाप तुम,
दुर्दशा उस पाप के पाप को तुम जान लो।
वीर हो तो वीरता के मूल को पहचान लो,
विद्यार्थी हो तो विद्या के विधि को जान लो।
तुम पराकर्मी योद्धा हो उस रणभूमि के,
रण में कौशल के विधा को सर्वप्रथम जान लो,
वीर हो तो वीरता के मूल को पहचान लो,
विद्यार्थी हो तो विद्या के विधि को जान लो।
जीत हो या हार हो होना नहीं भयभीत तुम,
जो मिले परिणाम सहर्ष उसे स्वीकार लो।
वीर हो तो वीरता के मूल को पहचान लो,
विद्यार्थी हो तो विद्या के विधि को जान लो।
-प्रमोद श्रीवास्तव साहित्य
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