माँ
तुम नाराज न हो
तो एक बात कहूँ
मैं भी
पिता की तरह
एक किसान बनूँगा
प्रतिदिन
बैलों को लेकर
कांधे पर हल लादकर
नदी के उस पार
खेत जोतने जाया करूँगा
उन खेतों पर
खूब श्रम करूँगा
उन्हें अपने खून पसीने से सींचूंगा भी
फिर देखना माँ
तुम जिन बीजों को
संजोकर रखती हो न
मैं उन्ही बीजों को
खेत मे बोऊंगा
जिससे खूब सारा
अनाज पैदा होगा
फिर हम
भूखे पेट नही सोएंगे माँ ।
*प्रमोद कुमार सरल*
*चित्रकूट*
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