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एक ही शख़्स

                
                                                         
                            ये शरारत भरी निगाहें, एक ही शख़्स को ढूँढती हैं,
                                                                 
                            
उसी एक शख़्स में हर रोज़, नई सी खूबियाँ ढूँढती हैं।

सब करें नफरत उससे, मुझे फिर भी प्यार आता है,
उसे देखूँ तो दिल में, एक नया ख्याल आता है।

समझाना पड़ता है मुर्शिद, इस नादान दिल को हर बार,
इसे समझना तो आता ही नहीं है।

कि वो शख़्स अब किसी और का हो गया है,
चाह कर भी अब वो मेरे पास आ नहीं सकता है।

फिर भी हम एक ही भ्रम में जिए जा रहे हैं,
कि वो लौटेगा, और एक दिन सब ठीक हो जाएगा।
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एक घंटा पहले

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