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सरकार काफ़िला ले तैयार हो के निकले सारे सवाल हाकिम दरबार हो के निकले

                
                                                         
                            सरकार काफ़िला ले तैयार हो के निकले
                                                                 
                            
सारे सवाल हाकिम दरबार हो के निले

जिल्लेइलाही यां भी जिल्लेइलाही वां भी
जिल्लेइलाही चर्चे अख़बार हो के निकल

बस जी-हुज़ूरी करके गुज़री है उम्र जिनकी
दरबारी पक्के फरमांँ बरदार हो के निकल

हम तो मियां हैं मुंहफट कहते खरी-खरी बस
सच हक़ बयानी करने दो-चार हो के निले

दैर ओ हरम ये मक़तल हैं इल्म रौशनी के
पढ़ लिख के ढ़ाई आखर हुशयार होके निकले

इक मर्तबा गए थे कूचा ए यार में हम
महबूब दर से फिर हम ज़रदार हो के निकल

अब छोड़ कर ये माया और ओढ़ कर फ़क़ीरी
ले हाथ में लुकाठी बाज़ार हो के निकले
जब 'दीप' ने पकड़ ली काग़ज़ क़लम औ स्याही
हर्फ़ ए तमन्ना दिल से अश'आर हो के निकले
-प्रदीप_तिवारी 'दीप'
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4 घंटे पहले

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