चीज़ का हो
साहित्य का
कलात्मक मूर्तियों के निर्माण का
काष्ठ कृति का
या कुछ और
यह सच है
कि सृजन के क्षण
होते हैं
जीवंत रूचि के
सुखद क्षण
इन क्षणों में होता नहीं
कोई भी भाव
पुनरावृति या अनुकरण का
होते है ऐसे क्षण
सदा नए
सृजनशील और
सुखद
जिनकी होती नहीं
कोई भी जद।
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