आज एक-दूसरे को
मान देने या
प्रणाम करने का भाव
हो रहा है बहुत कम समाज में
विद्यालय जाकर तो बच्चा
सीखता ही है
शिष्टाचार
लेकिन घर के विद्यालय से ही
होनी चाहिए
शुरुआत इसकी
लेकिन कई परिवारों में
अब बंद हो गया है
यह शिष्टाचार
न खुद करते हैं प्रणाम
और न सिखाते है
बच्चों को प्रणाम करना
भूलना नहीं चाहिए इसे
कि समग्र संसार का
मूल मंत्र है प्रणाम
किसी का दिल जीतना है हमें
या किसी को बनाना है हमें
अपना
तो इस काम में
प्रणाम से बढ़कर
और कुछ नहीं
सचमुच है बड़ी
ताकत और साधना
प्रणाम
समाज को जोड़ने का गोंद है
प्रणाम।
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