आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

इज़हार गुस्से का

                
                                                         
                            आता है जब गुस्सा
                                                                 
                            
किसी व्यक्ति को
तो कई बार उस गुस्से का
इज़हार
भी होता है भयंकर
कोई चीखता है
बुरी तरह से
तो कोई दे फेंकता है
हाथ में आई
किसी भी चीज़ को
तो कोई-कोई गुस्से के मारे
लग जाता है फाड़ने
अपनी कमीज़ और बनियान को ही
अमूमन हर गुस्से के
विस्फोट में होता है
कोई न कोई नुकसान
बस चीखने में ही
नहीं होता कोई भी नुकसान
मगर लगता है वह
सभी को नागवार
क्योंकि चीखकर गुस्से में
चला जाता वह व्यक्ति
शिष्टाचार के पार।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक घंटा पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर