आता है जब गुस्सा
किसी व्यक्ति को
तो कई बार उस गुस्से का
इज़हार
भी होता है भयंकर
कोई चीखता है
बुरी तरह से
तो कोई दे फेंकता है
हाथ में आई
किसी भी चीज़ को
तो कोई-कोई गुस्से के मारे
लग जाता है फाड़ने
अपनी कमीज़ और बनियान को ही
अमूमन हर गुस्से के
विस्फोट में होता है
कोई न कोई नुकसान
बस चीखने में ही
नहीं होता कोई भी नुकसान
मगर लगता है वह
सभी को नागवार
क्योंकि चीखकर गुस्से में
चला जाता वह व्यक्ति
शिष्टाचार के पार।
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