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हमारे अधिकारों की हदें

                
                                                         
                            बेशक हर नागरिक को
                                                                 
                            
दिए हैं संविधान ने
कुछ अधिकार
लेकिन उन अधिकारों
के साथ
हैं कुछ दायित्व भी
नागरिकों के
सवाल है
अपने अधिकारों को मांगते हुए
कितने निभा सकते हैं हम
अपने दायित्व
भूलना नहीं चाहिए
कि मिले हैं जो अधिकार हमें
उन अधिकारों की हैं
हदें भी
इन हदों से बाहर जाकर
मांगना अपना अधिकार
न तो है नैतिक
और न संवैधानिक ही
रखना चाहिए हमें
ध्यान इसका
सही-सही।
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एक घंटा पहले

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