आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

ज़िंदगी – एक रहस्य, एक रसायन

                
                                                         
                            ज़िंदगी एक रहस्य,
                                                                 
                            
ज़िंदगी एक रसायन।
ग़म करो कम,
चिंता उड़ाओ धुएं बनायन।

गलतियों को पहचान,
फिर उनको छान,
मत कर बवाल,
बस अहंकार को उबाल।

छोड़ो छुरी और पिस्टल,
तब पाओगे खुशी के क्रिस्टल।

रिश्ते बना, पास आ जा,
दूरी बना, तो दूर हो जाएगा साज़ा।

रिश्ते बनेंगे — खुशी मिलेगी,
रिश्ते टूटेंगे — खिनता मिलेगी।
कभी रिश्ते बनते किसी कारण,
रिश्तों में भी होते समीकरण।

रिश्तों में अपनापन,
ज़िंदगी में संतुलन।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर