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तो सच में… क्या बात होती।

                
                                                         
                            काश, तुम उस पल मेरे साथ होते,
                                                                 
                            
कुछ ख़्वाब हमारे भी ख़ास होते।
जो बात दिलों में रह गई थी,
वो बात अगर कह पाते—क्या बात होती।

तुम मेरी आँखों को पढ़ लेते,
मैं तुम्हारी ख़ामोशी समझ लेता,
जो दर्द छुपा था दोनों दिल में,
उसे मिलकर थोड़ा कम कर लेते।

न तुम दूर जाते, न हम तन्हा होते,
न आँखों में इतने आँसू होते।
तुम बस एक पल ठहर जाते,
तो शायद हम भी एक-दूजे के होते।

वक़्त की राह में यूँ बिछड़ गए,
कुछ सपने अधूरे ही रह गए।
हाथों में हाथ तो था कभी,
फिर जाने क्यों हाथ छूट गए।

आज भी जब तुम्हारी याद आती है,
आँखों में नमी छोड़ जाती है।
दिल लाख समझाए ख़ुद को मगर,
हर धड़कन तुम्हें ही बुलाती है।

काश, तुम उस पल मेरे साथ होते,
तो शायद कुछ और ही हालात होते।
न कोई शिकवा, न कोई सवाल होता,
बस प्यार ही प्यार बेहिसाब होता।

मगर किस्मत ने लिखी थी जुदाई,
हमने हँसकर हर चोट छुपाई।
तुम मिलते तो कहानी कुछ और होती,
तुम रुकते तो ज़िंदगी कुछ और होती।

अब बस दिल में एक सवाल रहता है—
जो हुआ, वो क्यों हुआ, ये मलाल रहता है।
तुम मेरे होते, मैं तुम्हारा होता,
तो सच कहूँ…
हमारी कहानी में भी एक खूबसूरत “अंजाम” होता।

काश, तुम उस पल मेरे साथ होते—
तो सच में… क्या बात होती।
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3 घंटे पहले

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