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पूंछ रहीं से मातृभाषा पोवारी।।

                
                                                         
                            जल बिन मछली
                                                                 
                            
कसी बच पाये?
कर्णधारों ला,
पूंछ रहीं से मातृभाषा पोवारी।।

दिवो को बिना
बाती कसी जल पायें?
कर्णधारों ला,
पूंछ रहीं से मातृभाषा पोवारी।।

माटी को बिना
वटवृक्ष कसो जग पायें?
कर्णधारों ला,
पूंछ रहीं से मातृभाषा पोवारी।।

हवा को बिना
फुलों की खुशबू कसी फैल पायें।
कर्णधारों ला,
पूंछ रहीं से मातृभाषा पोवारी।।

पानी को पाट को बिना
तलाव को पानी खेत मा जायें कसो ?
कर्णधारों ला,
पूंछ रहीं से मातृभाषा पोवारी।।

संवाहिका को बिना
कसी संवाहित होय पायें संस्कृति?
कर्णधारों ला,
पूंछ रहीं से मातृभाषा पोवारी।।

मातृभाषा को बिना नवीं पीढ़ी
जड़ों सीन कसी जुड़ पाये?
कर्णधारों ला,
पूंछ रहीं से मातृभाषा पोवारी।।

--ओ सी पटले
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39 मिनट पहले

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