आता मातृभाषा पोवारी
शब्दों को अलंकरण करन लगी।
कल्पनाओं का पंख लगायके,
साहित्य मा ऊंची उड़ान लेन लगी।।
आता मातृभाषा पोवारी
होठों पर शान लक इठलान लगी ।
कल्पनाओं का पंख लगायके,
साहित्य मा ऊंची उड़ान लेन लगी।।
असीम संभावनाओं मा
विकास की संभावना तलाशन लगी।
कल्पनाओं का पंख लगायके,
साहित्य मा ऊंची उड़ान लेन लगी।।
हिन्दी को घर आंगन मा
सम्मान सहित नियमित जान लगी।
कल्पनाओं का पंख लगायके,
साहित्य मा ऊंची उड़ान लेन लगी।।
हिन्दी साहित्यिक मंचों पर,
आपली रंग छटाएं बिखेरन लगी।
कल्पनाओं का पंख लगायके,
साहित्य मा ऊंची उड़ान लेन लगी।।
हिन्दी जगत मा
घनी ठंडी छांव महसूस करन लगी।
कल्पनाओं का पंख लगायके,
साहित्य मा ऊंची उड़ान लेन लगी।।
अप्रत्याशित विकास लक
सबला आश्चर्यचकित करन लगी।
कल्पनाओं का पंख लगायके,
साहित्य मा ऊंची उड़ान लेन लगी।।
-ओ सी पटले
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