जिए तो कुछ ऐसे जिए हम
मुस्कुराते भी रहे और
गम उठते भी रहे
लबों ने गुनगुनाना नही छोड़ा
और बेरुखियों ने दिल भी बहुत तोड़ा
पर अपनी हसरतों की मासूमियत तो देखो
उन्ही दर्द के लम्हों में अपनी हसरतों को सजाते रहे
जिंदगी की रफ्तार बहुत तेज है
मेरे विचारों में स्थिरता की सादगी
तभी किसी के पीछे चलते नही हम
है अपनी ही धुन में आवारगी
अपनी खामोशी से दिल लगा बैठे हैं
सबकी आवाजों में खो जाते हैं कहीं
राहत भी है और सुकून भी है मेरी इस तन्हाई में
वर्ना उलझ जाते हैं हम जज्बातों की रुसवाई में
दिन के उजाले राह तकते है
रातों को इंतजार रहता है मुलाकातों का
जवाब बन जाती है खुद जिंदगी मेरी
फर्क नहीं पड़ता है कैसे भी हालातों का
बारिशों को दिल की धड़कन बनाके
आसमां को संग अपने रूलाते भी रहे
गम उठाते भी रहे और मुस्कुराते भी रहे
पूनम राठौर
हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X