ऐ समंदर !
तू इतना क्यों शोर मचाता है ?
क्या तुम साहिल से
मिलने का स्वांग रचाता है ?
या फिर अपने विशाल होने का
प्रमाण बताता है ?
माना कि तुझमें
गहराई बहुत है
पर तेरी गहराई भी तो
मानव के हाथों नप जाती है,
नाप सके तो नाप ले
मानव के मन को
जिसकी गहराई
कोई नाप नहीं पाता है ।
--पूनम झा
कोटा, राजस्थान
Mob+wat -9414875654
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