सादगी से बोला था जो सच सुना नहीं
तमाशा करता झूठ भी दस्तूर हो गया
मेहनत के पसीने से बू आने लगी उनको
मक्कारी का इत्र इतना मशहूर हो गया
सादगी से बोला था जो सच सुना नहीं
तमाशा करता झूठ भी दस्तूर हो गया
मैं बाजार मे हूूूं तो बिकाऊं न समझना
उसूलों की चमड़ी खुद्दारी का लहू लिए हूूूं
गुरूर उतना ही अब भी न टूट पाने का
शीशे सा दिल फिर भी चकनाचूर हो गया
सादगी से बोला था जो सच सुना नहीं
तमाशा करता झूठ भी दस्तूर हो गया
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