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पुलवामा अटैक

                
                                                         
                            आसमां भी रोया होगा,
                                                                 
                            
धरती भी थर्रायी होगी |
पुलवामा में जब वीरों ने,
अपनी जान गवांयी होगी |
बह रहा जब लहू धरा पर,
आह धरा से आयी होगी |
उजड़ गये थे कई चमन,
जो थे किसी श्रृंगार के |
रातें काली हो गई और,
दिन बने अंगार के |
दसों दिशाएं सिहर गयी जब,
ग़मों की आँधी आयी होगी |
पुलवामा में जब वीरों ने,
अपनी जान गवांयी होगी |
जब चिताओं की चिंगारी से,
धरा ये सुलग रही थी |
हर तरफ़ वीरानगी थी,
भारती माँ झुलस रही थी|
जब वन उपवन में ज्वाला भड़की,
कलियाँ तो मुरझाई होंगी |
पुलवामा में जब वीरों ने,
अपनी जान गवांयी होगी |
आसमां भी रोया होगा,
धरती भी थर्रायी होगी |
पुलवामा में जब वीरों ने,
अपनी जान गवांयी होगी |

पुलवामा के शहीदों को विनम्र श्रद्धांजलि
भारत माता की जय, वन्दे मातरम्


पूजा यादव


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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7 वर्ष पहले

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