आसमां भी रोया होगा,
धरती भी थर्रायी होगी |
पुलवामा में जब वीरों ने,
अपनी जान गवांयी होगी |
बह रहा जब लहू धरा पर,
आह धरा से आयी होगी |
उजड़ गये थे कई चमन,
जो थे किसी श्रृंगार के |
रातें काली हो गई और,
दिन बने अंगार के |
दसों दिशाएं सिहर गयी जब,
ग़मों की आँधी आयी होगी |
पुलवामा में जब वीरों ने,
अपनी जान गवांयी होगी |
जब चिताओं की चिंगारी से,
धरा ये सुलग रही थी |
हर तरफ़ वीरानगी थी,
भारती माँ झुलस रही थी|
जब वन उपवन में ज्वाला भड़की,
कलियाँ तो मुरझाई होंगी |
पुलवामा में जब वीरों ने,
अपनी जान गवांयी होगी |
आसमां भी रोया होगा,
धरती भी थर्रायी होगी |
पुलवामा में जब वीरों ने,
अपनी जान गवांयी होगी |
पुलवामा के शहीदों को विनम्र श्रद्धांजलि
भारत माता की जय, वन्दे मातरम्
पूजा यादव
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