आजकल इंसान में इंसानियत रही कहां
हर कहीं हिन्दू और मुस्लमान हो गया
किसी को लगता लाऊड स्पीकर से डर
कोई मंदिर की घंटी से परेशान हो गया
आजकल इंसान में इंसानियत रही कहां
हर कोई हिन्दू या मुस्लमान हो गया
होली से रंग दीवाली से मिठास जाती रही
ईद की महक बंद किंवाड़ से आती नहीं
किसी के लिये होती है होली दिवाली
और किसी का होकर रमजान रह गया
आज कल इंसान में इंसानियत रही कहां
हर कोई हिन्दू या मुस्लमान हो गया
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