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आसमान में वारदात होती

                
                                                         
                            वो तो खैर है परिंदो की नहीं जात होती
                                                                 
                            
वर्ना आसमान में भी कई वारदात होती
कभी कभी टपकता लहू फिर बदलों से भी
बेज़ुबान जिस्म के चीथड़ों की बरसात होती
वो तो खैर है परिंदों की नहीं जात होती
वर्ना आसमान में भी कई वारदात होती
अगर फलक पर भी ज़मीन जैसे हालात होते
फ़सादो में इनके कई घोंसले बर्बाद होते
हवाओं में घुलता नफरती नफरत का ज़हर
दोस्ती भी फिर जहां में बदले के साथ होती
वो तो खैर है परिंदों की जात नहीं होती
वर्ना आसमान में भी कई वारदात होती


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7 वर्ष पहले

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