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सब कुछ कुछ नहीं

                
                                                         
                            सब कहना चाहती हूं
                                                                 
                            
कुछ कह नहीं पा रही हूं
सब बताना चाहती हूं
कुछ बता नहीं पा रही हूं
भ्रम की जाल से मुक्त होना चाहती हूं
पर हो नहीं पा रही हूं
हालातो से लड़ना चाहती हूं
लड़ नहीं पा रही हूं
जिंदगी जीना चाहती हूं
जी नहीं पा रही हूं
खुद को खुद की नजर में साबित करना चाहती हूं
पर कर नहीं पा रही हूं
एहसास जीतना चाहती हूं
पर हारे जा रही हूं
मंजिल पर जाना चाहती हूं
जा नहीं पा रही हूं
सब पाना चाहती हूं
सब करना चाहती हूं
कुछ कर नहीं पा रही हूं
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 वर्ष पहले

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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